उपलब्धियाँ

Rs. 8.24 crore for computerization of Jan Seva centres Rs. 8.24 crore for computerization of Jan Seva centres
Welcome to Government of Gujarat Revenue Department Welcome to Government of Gujarat Revenue Department
7 Districts and 22 Talukas constituted in the state of Gujarat 7 Districts and 22 Talukas constituted in the state of Gujarat

મહેસૂલ વિભાગ : લોકાભિમુખ અભિગમ

पारदर्शी एवं अनुकूल प्रशासन
परिवर्तित आवश्यकताओं के अनुसार नीति निर्माण
सेवा देने की पद्धतियों और कार्यों का सरलीकरण
समुचित भूमि प्रबंधन द्वारा संरक्षण एवं अनुरक्षण
क्षमता निर्माण एवं जवाबदेय प्रशासन का गठन
2001
2013

हमारी तहसील, वाइब्रंट तहसील

  • राज्य स्तर पर आयोजन कार्यपद्धति का विकास
  • जिला स्तर पर आबंटन एवं अनुवीक्षण
  • विभागानुसार अधिकारियों के जटिल एवं उलझनपूर्ण कार्य

लोगों के दरवाजों तक पहुँचना : प्रभावी सरकार

  • इस योजना को लागू करने वाला प्रथम राज्य - गुजरात
  • माननीय मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी की यह संकल्पना यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सरकार के राज्य प्रशासन की पहुँच नागरिकों के दरवाजों तक हो ।
  • जनसेवा केन्द्र प्रबंधन यह सुनिश्चित करने के लिए है कि एक ही स्थान पर 156 से अधिक सेवाएँ उपलब्ध हों ।
  • कार्य की सफलता हेतु तहसील स्तर पर तहसील विकास आयोजन, निधि-आबंटन एवं अनुवीक्षण सुविधा उपलब्ध करना ।
  • 116 क्षेत्रों के समूह के अधीन राज्य की 248 तहसीलों को रखकर तहसील स्तर पर प्रशासन का एक नया प्रयोग ।
  • नए 57 क्षेत्र, 1467 पदों का सृजन जिनमें 396 उप तहसीलदारों, 225 उप कार्यपालक अभियंताओं, 225 सहायक अभियंताओं, 335 लिपिकों, 225 उप लेखाकारों के पद शामिल हैं ।
  • भौगोलिक एवं स्थानीय स्थितियों के अनुसार गाँवों के आबंटन द्वारा महिला एवं बाल विकास जैसे विभिन्न विभागों के अधिकारियों और तहसीलदार, तहसील विकास अधिकारी, उप कार्यपालक अधिकारी, रेंज वन अधिकारी के बीच गाँवों के समूह का निर्माण ।
આપણો તાલુકો, વાયબ્રન્ટ તાલુકો
 

जनसेवा केन्द्र

  • ई-प्रशासन के दृष्टिकोण का अभाव ।

जनसामान्य की सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता

  • राज्य के समग्र प्रशासनिक क्षेत्र में जन केन्द्रित प्रशासन की स्थापना हेतु 7 नए जिलों और 22 नई तहसीलों का गठन ।
  • राज्य की सभी 248 तहसीलों में जनसेवा केन्द्र कार्यरत हैं ।
  • जी-स्वान जुड़ाव के साथ सेवा काउंटर कार्यरत हैं ।
  • प्रत्येक जनसेवा केन्द्र में कम्प्यूटर, वेबकेम और प्रिंटर के लिए रु. 8.24 करोड़ का आबंटन ।
  • प्राप्त आवेदन पत्रों के निपटान का स्तर तय करना तथा सेवा केन्द्र पर समय सीमा प्रदर्शित करना ।
  • प्रत्येक जनसेवा केन्द्र पर ई-सेवा सोसाइटी के गठन हेतु रु. 2.25 करोड़ का आबंटन ।
જનસેવા કેન્દ્રો
 

ई-लैंड (ई-भूमि)

  • दस्तावेजों के पंजीयन तथा नोट में परिवर्तन हेतु रजिस्ट्रार, तहसीलदार, पटवारी जैसे कई स्तरों पर कार्य किया जाता था ।
  • इससे समय, ऊर्जा और धन का अपव्यय होता था ।
  • पांडुलिपि, हस्तलिखित दाखिल-खारिज प्रविष्टि की प्रक्रिया जटिल थी ।
  • जंत्री के अभाव में भूमि का मूल्यांकन सुनिश्चित करने में देरी तथा लेखाधारक की परेशानी ।

पारदर्शी कार्यविधि : भूमि परिरक्षण

  • ई-भूमि सेवा के शुरू होने से गुजरात को सभी 248 तहसीलों में दाखिल-खारिज प्रविष्टियाँ स्वालित रूप में करना ।
  • गाँव फॉर्म संख्या 7/12 में प्रविष्टि हेतु दस्तावेजों का पंजीकरण तथा मात्र एक ही स्थान पर 135-डी नोटिस तैयार करना और रिकॉर्ड रखना ।
  • भूमि विक्रेता/क्रेता दोनों के फोटोग्राफ भूमि लेन-देन में फिंगर प्रिंट के साथ रखने की व्यवस्था होना ।
  • कम्प्यूटर के माध्यम से साइट पर जंत्री आधारित भूमि की कीमत की जाँच करना ।
  • स्थल पर ही ई-स्टांपिंग के माध्यम से दस्तावेज शुल्क की अदायगी का प्रावधान ।
  • ग्राम फॉर्म-6 में स्वतः प्रविष्टि करने का आयोजन ।
  • संबंधित हितार्थी पार्टियों को स्थल पर ही 135-डी नोटिस देना ।
  • 7/12 फॉर्म में मूल लेखा धारक एवं खरीदने वाले का नाम दर्ज करना ।
  • प्रविष्टि को प्रमाणित करके केवल खरीदने वाले का नाम 7/12 में दाखिल करना ।
  • फॉर्म संख्या-7 और 12 से गाँव को पृथक करके गाँव फॉर्म सं.-7 को भूमि के नक्शे के साथ दिया जाता है ।
ઇ-જમીન
 

पुनः सर्वेक्षण

  • भूमि पुनर्सर्वेक्षण की व्यवस्था 30 वर्षों के अंतराल पर की गई है लेकिन पिछले 100 वर्षों से पुनर्सर्वेक्षण का कार्य नहीं किया गया है ।
  • पुनर्सर्वेक्षण का कार्य करना बेहद खर्चीला होता है तथा इसमें बहुत बड़ी संख्या में मानवशक्ति लगाने की आवश्यकता होती है । यही कारण है कि इसे नहीं किया गया है ।
  • रिकॉर्ड में सडकों, नहरों और गैर-कृषि मामलों की मंजूरी हेतु प्रभावी उपाय नहीं किए गए थे ।

भूमि का समुचित प्रबंधन : अनुकरणीय आयोजन

  • राज्य में विकास कार्यों हेतु अद्यतन एवं प्रमाणित भूमि रिकॉर्ड उपलब्ध कराने हेतु पहुँच बनाना जिसकी औद्योगिक क्षेत्र में दिन दूनी रात चौगुनी माँग बढ़ रही है ।
  • आधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से एक अभियान के भाग के रूप में पुनर्सर्वेक्षण का कार्य करने वाला पहला राज्य गुजरात है ।
  • पुनर्सर्वेक्षण कार्यविधि जामनगर, पाटन, गांधीनगर, अहमदाबाद, राजकोट, कच्छ, साबरकांठा, तापी, वडोदरा और सुरेन्द्रनगर जिलों में गतिमान है ।
  • वर्ष 2012-13 में आनंद, नर्मदा, सूरत, पंचमहल, बनासकांठा, खेड़ा, भावनगर, मेहसाना, वलसाड, दाहोद, अमरेली और नवसारी जिलों में इस कार्य को करने की योजना है ।
  • पुनर्सर्वेक्षण से संबंधित कार्य दूसरे राज्यों के लिए अनुकरणीय है, अन्य राज्यों द्वारा तथा अध्ययन हेतु दौरे किए गए हैं ।
  • वर्ष 2015 तक समग्र राज्य का पुनर्सर्वेक्षण पूर्ण करने की योजना है ।
રી-સરવે
 

नगर सर्वेक्षण

  • संपत्ति को प्रमाणित करने हेतु अधिकार के अभिप्रमाणन से संबंधित कार्यों में देरी ।
  • शहरी क्षेत्रों में बढ़ते हुए संपत्ति कर के खिलाफ थोड़े से गाँवों में नगर सर्वेक्षण का अमलीकरण ।
  • नगर सर्वेक्षण रिकॉर्ड तैयार करने में देरी ।

મसंपत्ति का समुचित प्रबंधन

  • लाइसेंसी सर्वेयर की पद्धति सहित व्यावसायिक, पात्र लोगों को निजी लाइसेंस ।
  • 368 सर्वेयरों की नई सीधी भर्ती की प्रक्रिया का समापन ।
  • नगर निगमों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में संपत्ति कार्ड की कम्प्यूटरीकृत पद्धति ।
  • राज्य के सभी गाँवों के नक्शे स्कैनिंग प्रक्रिया द्वारा भूमि राजकोष विभाग में उपलब्ध कराकर उनका प्रकाशन कार्य ।
  • 51 लाख संपत्तियों का नगर सर्वेक्षण रिकॉर्ड तैयार करने हेतु आयोजन ।
  • 8 जिलों में टीपी योजनाओं के कुल 3.30 लाख अंतिम प्लॉट से नगर सर्वेक्षण रिकॉर्ड तैयार करने हेतु आयोजन ।
  • चालू वर्ष में रु. 4.15 करोड़ का प्रावधान ।
સીટી સરવે
 

सरकारी भूमि का मूल्यांकन

  • पिछली आकलन पद्धति में परिवर्तन करने के लिए अभ्यावेदन प्रस्तुत किए गए थे तथा इस पद्धति के प्रति असंतोष व्याप्त था । उस तारीख को विद्यमान नियमों के मुताबिक मूल्यांकन किया गया था ।
  • पिछले पाँच वर्षों की बिक्री को ध्यान में लिया गया था ।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क के पास वाली और सड़क से दूर वाली जमीनों की कीमत में असंगति पाई गई ।

सुसंतुलित एवं पारदर्शी पद्धति

  • 50 लाख रु. से अधिक के मूल्यांकन हेतु मुख्य नगर आयोजनाकार द्वारा मूल्यांकन की समांतर कार्यपद्धति सुनिश्चित करने हेतु व्यवस्था की गई है ।
  • भूमि के मूल्यांकन हेतु उपलब्ध बिक्री के चयन, मूल्यांकन विनिर्धारित तारीख हेतु ब्यौरेवार व्यवस्था तथा प्रभावी तिथि से ग्रेडिंग ।
  • 1 से 1.5 के व्यास की परिसीमा में विवादित भूमि की बिक्री को दर्ज करने का प्रावधान ।
  • पिछले एक वर्ष की समस्त बिक्री से संबंधित ध्यान में लेने हेतु ब्यौरों का प्रावधान ।
  • यदि एक वर्ष की बिक्री से संबंधित ब्यौरे प्राप्त करना संभव न हो तो पिछली औसत बिक्री पर 12 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का प्रावधान है ।
  • यदि विकास योजना में भूमि को शामिल किया गया हो तो औसत कीमत में 50 प्रतिशत से 200 प्रतिशत की वृद्धि करना ।.
  • जनमार्ग (पब्लिक रोड) की पहुँच वाली भूमि की औसत कीमत के आकलन में 10 प्रतिशत से 200 प्रतिशत का प्रावधान ।
  • भूमि के ऊँचे मूल्यांकन के संबंध में लोगों द्वारा प्रस्तुत किए गए अभ्यावेदनों के संबंध में असंगति को दूर करना या पहुँच होना ।
  • मूल्यांकन को ध्यान में रखकर निर्णय लेना जो कि नगर आयोजना अधिकारी द्वारा जिला मूल्यांकन समिति और बिक्री लेन-देन के माध्यम से निर्धारित होता है ।
 

एन ए अनुमति

  • एन ए अनुमति की 90 दिनों की अवधि थी ।
  • 19 कार्यालयों के प्रमाणपत्रों की इस हेतु जरूरत होती थी ।
  • प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए आवेदक आवेदन देता था ।
  • कलेक्टर और जिला पंचायत को इस हेतु अधिकार प्राप्त हैं ।

पारदर्शी पद्धति का नियोजित अमलीकरण

  • एन ए अनुमति हेतु ओपन हाउस पहुँच के साथ अधिकतम 45 दिनों की समय सीमा ।
  • आवासीय उद्देश्य हेतु 30 दिनों की समय सीमा ।
  • 19 प्रमाणपत्रों के स्थान पर मात्र 6 मामलों का सत्यापन ।
  • कार्यालय के माध्यम से सभी प्रमाणपत्रों को प्राप्त करने का प्रावधान ।
  • एन ए अनुमति में शीघ्रता एवं प्रभवन्विता लाने हेतु जिला समन्वय समिति में मामलों पर विचार-विमर्श तथा आरआईसी के माध्यम से सर्वेक्षण रिपोर्ट का अनुवीक्षण ।
  • ए, बी श्रेणी के अधिकार नगर निगमों, प्राधिकरणों और नगर पालिकाओं को प्रदत्त ।
  • सी और डी श्रेणी की नगर पालिकाओं हेतु क्षेत्रीय प्राधिकरण को अधिकार ।
  • 3000 से अधिक जनसंख्या वाले गाँवों के लिए जिला पंचायत को अधिकार ।
  • 3000 से कम जनसंख्या वाले गाँवों में एक करोड़ तक तहसील पंचायत को अधिकार ।
  • राजकोट और वलसाड जिला पंचायत द्वारा लोगों को एन ए अनुमति देने के लिए निर्णय लिए गए हैं ।
  • अहमदाबाद सहित सभी जिलों में लोगों को एन ए अनुमति देने के लिए अमलीकरण ।

Subjects

मुलाक़ाती : 4984133
पिछला परिवर्तन : जनवरी 17 2019